No role of Mandirs in Kisan Andolan, why ?
Proud to be a sikh !!
पंजाब और पंजाबियों ने पूरे विश्व में अपने गुरुओं द्वारा चलाई गई लंगर की प्रथा कायम रख कर अपने धर्म के प्रति मान - सम्मान को और भी ऊंचा किया है, खास तौर पर कोरोना काल में जगह जगह लंगर लगाए गए और गुरद्वारों में से भी लंगर बनाकर ज़रूरत मन्दो को बांटा गया और वह भी बिना जात पात और पक्षपात के !
लेकिन जब अभी सब किसान ( किसी भी धर्म के ) आंदोलकर रहे हैं अपने हकों के लिए तो उनका एहसान चुकाने की बजाए भारतीय सियासत दान उनपर भद्दे भद्दे इल्ज़ाम लगा कर बस सेवा न करने का बहाना ढूंढ कर अपनी तिजोरियां भरने में व्यस्त हैं या खुद प्रधानमंत्री उसको पोलिटिकल जामा पहनाकर बदनाम करने की हर सम्भव कोशिश में जुटे हैं !
माफ करना, कोरोना काल में मेरे कुछ साथियों ने मंदिर, मस्जिद में भी हर जगह सेनिटाइजर छिड़के बिना पक्षपात किये और आज की तारीख में मुझे गिनती में समझा दो कि कितने मंदिरों के ट्रस्ट ने लंगर बांट दिया या सहायता दी इन किसानों को, मतलब उनका सिर्फ पोलोटिकल स्वार्थ अगर पूरा हो तभी सहायता करेंगे !
मुझे गर्व है अपने सिख धर्म पर जो इन सभी धर्म के ठेकेदारों की मानवता के लिए जात-पात, पक्षपात जैसी भावनायों से कहीं ऊंचा है !
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